युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

गांधीजी!!! आप भी सीख लो!

बैसला जी, राजस्थान में रेल रोकेगें.. अंहिसात्मक तरीके से.. पिछली बार देखी थी अहिंसा? आज फिर है.. गांधीजी आप सुन रहे है ना..आ जाओ वापस अगर सीखना है तो.

1 comments:

कुश एक खूबसूरत ख्याल May 23, 2008 at 1:49 PM  

एक साल पहले भी ऐसा ही अहिंसात्मक आंदोलन कर चुके है.. जिसमे कई जाने गयी थी.. ये कैसी अहिंसा है.. गाँधी जी यदि जीवित होते तो यही सोच रहे होते..

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