करीब ४५ दिन पुर्व एक "महिला ओटो चालक" को देखकर मन में विचार आया कि देश में महिला हर क्षेत्र मे बुलन्दिया छु रही है. तब ये नही पता था की उससे कही ऊची उडान शिघ्र देखने को मिल सकती है, देश एक और मुकाम हासिल करने से चन्द कदम दुर है.
आजादी के साठ वर्षों बाद वो क्षण आने वाला है जब देश कि प्रथम नागरिक एक महिला होगी. "श्रीमति प्रतिभा देवीसिहं पाटिल".
एक महिला का देश के सर्वोच पद पर चुना जाना भारत मे महिला सशक्तिकरण कि दिशा मे मील का पत्थर साबित होगा.
इस पुरुष प्रधान देश मे.. जहाँ लिंग अनुपात लगातार कम हो रहा है, कन्या भुर्ण की हत्या आम बात है, शाला वंचित लडकियो कि संख्या करोडों मे है, महिला पर हुए अपराध दर्ज ही नहीं किये जाते. एसे में एक महिला राष्टपति होना समाज मे महिलाओ के प्रति सकारत्मक सोच को जन्म देगा.
इस पुरुष प्रधान देश मे.. जहाँ लिंग अनुपात लगातार कम हो रहा है, कन्या भुर्ण की हत्या आम बात है, शाला वंचित लडकियो कि संख्या करोडों मे है, महिला पर हुए अपराध दर्ज ही नहीं किये जाते. एसे में एक महिला राष्टपति होना समाज मे महिलाओ के प्रति सकारत्मक सोच को जन्म देगा.
आइये, हम खुले मन से "बदलाव की इस बायर" (हवा) का स्वागत करें!
(फोटो : Hindu.com)
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