युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

Love and hate relationship


I love chewing gum, they are sweet and refreshing when I put them in my mouth.. I love them for 10-15 minutes… after that they lose taste and I wanted to throw them….. but being lazy it’s hard for me to walk and being ‘civilized’ I can’t throw them where I am sitting… and as enjoyed them for only 10-15 min I want to have more out of them… so I chew them for another 15-20 minutes… new my jaw started pain… I want to throw it asap… but because now it’s in my mouth for about 30 minutes… I developed a relationship…. and because of this love I somehow spent 30 more minutes with it…… now my jaws are really tired now… pain is unbearable…and the chewing gum became completely tasteless… I started hating it…. I spent another 20-30 minutes in this hate relationship… and after that… I say myself enough is enough…. No more suffering… I concur my laziness and put my emotions on side…. stand up and walk to the dustbin…and say a final good bye to my lovely chewing gum…

(it’s a true love story, partly inspired by a dialogue from the movie Tees Maar Khan)

दो किलो बासमती चावल

भारत से दो किलो बढ़िया बासमती चावल लेकर चले हैती की और.. अमेरिका में कस्टम अधिकारियों द्वारा रोक लिए गए.. बोला चावल ले जाना मना है.. बहस की कोई गुंजाईश नहीं.. भारी मन से चावल देकर बैग हल्का किया.. आगे चल बैग अगली फ्लाईट में चेक इन के लिए दे दिए.. गम दो किलो चावलों का था और ये भी कि आगे और चावल लाने का रास्ता भी बंद.. सोचते हुए दो मंजिल ऊपर चढ़ गए.. चावल छूटे तो छूटे अगली फ्लाईट तो नहीं छूटनी चाहिए.. जैसे ही सुरक्षा जांच कि लाइन में लगे एक वर्दीधारी मुझे खोजता हुआ आया.. मन में आया चावल तो ले लिए अब क्या दाल भी लोगे..पर बन्दा शरीफ था.. बोला "मिस्टर मोहनोत, अगर आपके आप वक्त है तो मेरे साथ वापस चलो, आपके चावल लौटाने है" घड़ी देखी पता चला फ्लाईट में अभी ६० मिनिट है.. उसके साथ जाया जा सकता है... रास्ते में बंदे में पांच बार माफी मांगी... बोला "सोरी मैंने ध्यान नहीं दिया, आप हैती जा रहें है. वहां चावल ले जा सकते है" बहुत अदब से बात कि, चावल लौटाए.. वापसी में दरवाजे तक छोड़ने आया.. मैं पुरे रास्ते सोचता रहा कि ये लोग कितने प्रोफेशनल है... गलत होने भी नही देते और गलत करते भी नहीं है... और ये ही चीजें भारत और अमेरिका में फर्क करती है...

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संकलक

www.blogvani.com चिट्ठाजगत