युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

इण्डिया अगेंस्ट करप्शन - IAC

आज इण्डिया अगेंस्ट करप्शन कि और कमेटी से कासमी साहेब को निकाल दिया गया.... कासमी जी पर आरोप है कि वो मीटिंग में ऑडियो/विडीयो रिकोर्डिंग कर रहे थे....

पहली बार में अजीब लगा... क्या ये वो ही समूह है जो लोकपाल बिल कि ड्राफ्टिंग कमिटी कि बैठकों कि रिकोर्डिंग चाहता था... क्या ये वो ही समूह है जो सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता कि वकालत करता है...  आप चाहते है कि पारदर्शिता हो.. तो वो ही आप अपने समूह पर लागू क्यों नही कर सकते... सुविधानुसार नैतिक मूल्यों का चुनाव कर दोहरा मापदंड क्यों?

इसी सिलसिले में कोर कमिटी के मीटिंग मिनिट्स खोजे तो पता चला कि मीटिंग मिनिट्स कुछ इस मोहतरमा कि पौशाक जैसे है... जिसमें छुपाने कि कोशिश ज्यादा है और दिखाने कि कम.... आठ घंटों कि बैठक के मिनिट्स डेढ़ पन्नों में समेट कर छाप रस्म आदायगी कर कि गई....



मीटिंग मिनिट्स होने चाहिए कुछ इस तरह है..... दिखाई ज्याद दे, छुपाया कम जाए... और बिल्कुल हॉट....


निर्मल बाबा फ्रोड क्यों?

निर्मल बाबा फ्रोड क्यों? 


अभी तक जो बातें सामने आई है क्या वो निर्मल जीत सिंह उर्फ निर्मल बाबा को फ्रोड कहने के लिए काफी है.... 

  1. निर्मल जीत सिंह ने विज्ञापन देकर समागम में लोगो को बुलाया.. लोगों ने बैक में जा कर अपनी इच्छा से पैसे जमा करवाए..... पहली नजर में शायद ये एक मात्र बाबा है जिसका सारा कारोबार सफेद धन का है... 
  2. बाबा पिछले पांच साल से समागम कर रहा है... सारे चेनल उसका कार्यक्रम दिखाते है.... पूरा पैसा लेकर... बाबा कि बातें में और उपायों में कोई परिवर्तन नहीं आया... फिर ये अचानक बाबा फ्रोड कैसे हो गया... क्या सभी पांच साल से सो रहे थे... ये साधारण सी बात समझने के लिए इतना वक्त लगा... या जब तक कमाना था कमा लिया और जब हवा का रुख बदला तो न्यूज रिपोर्टरों ने अपना मिजाज बदल दिया.. 
  3. बाबा ने करोड़ों कमाए तो ये करोड़ों रुपये लाखों लोगों ने दिए.. और एक दिन में नहीं दिए कई शहरों के लोगों ने दिए... कई सालों तक दिए.. कितनों ने फ्रोड कि शिकायत दर्ज करवाई? 
  4. बाबा ने जो पैसे लिए वो एंट्री फीस के रूप में लिए.. ये कोई दान और चन्दा नहीं है... बाबा ने अपनी कमाई पर टेक्स दिया (अभी तक कोई टेक्स चोरी का मामला नहीं आया) फिर बाबा अपने पैसे से होटल ख़रीदे या फ्लेट.. किसी को क्या लेना देना... 
  5. बाबा कौन है? कहाँ से आया है? क्या करता था? पैसा देने से पहले किसी ने जानने कि कोशिश की? निर्मल बाबा आसमान से नहीं टपका, ये हमारी सोच और हमारी व्यवस्था कि ही उपज है.. 



हम इसी तरह हमारे ‘बाबाओं’ का चुनाव करते है... हम इसी तरह हमारे नेताओं को चुनते है... हम इसी तरह कम कीमत में चमत्कार के सहारे सफलता चाहते है... हम इसी तरह अपने स्वार्थों के लिए वोट देते है..... हम इसी तरह कुछ दिन के लिए हल्ला मचातें है... हम इसी तरह चाहते है कि शुरुआत कोई और करें.... 


निर्मल बाबा बुद्धिमान नहीं, हम मुर्ख और स्वार्थी है... निर्मल बाबा न पहला उदाहरण है न ही आखिरी... अगर ध्यान से देखेगें तो शायद लाखो ऐसे बाबा मिलेगें और करोड़ों ऐसे भक्त.... 


“बाबाजी” कृपा बनाए रखें....

Love and hate relationship


I love chewing gum, they are sweet and refreshing when I put them in my mouth.. I love them for 10-15 minutes… after that they lose taste and I wanted to throw them….. but being lazy it’s hard for me to walk and being ‘civilized’ I can’t throw them where I am sitting… and as enjoyed them for only 10-15 min I want to have more out of them… so I chew them for another 15-20 minutes… new my jaw started pain… I want to throw it asap… but because now it’s in my mouth for about 30 minutes… I developed a relationship…. and because of this love I somehow spent 30 more minutes with it…… now my jaws are really tired now… pain is unbearable…and the chewing gum became completely tasteless… I started hating it…. I spent another 20-30 minutes in this hate relationship… and after that… I say myself enough is enough…. No more suffering… I concur my laziness and put my emotions on side…. stand up and walk to the dustbin…and say a final good bye to my lovely chewing gum…

(it’s a true love story, partly inspired by a dialogue from the movie Tees Maar Khan)

दो किलो बासमती चावल

भारत से दो किलो बढ़िया बासमती चावल लेकर चले हैती की और.. अमेरिका में कस्टम अधिकारियों द्वारा रोक लिए गए.. बोला चावल ले जाना मना है.. बहस की कोई गुंजाईश नहीं.. भारी मन से चावल देकर बैग हल्का किया.. आगे चल बैग अगली फ्लाईट में चेक इन के लिए दे दिए.. गम दो किलो चावलों का था और ये भी कि आगे और चावल लाने का रास्ता भी बंद.. सोचते हुए दो मंजिल ऊपर चढ़ गए.. चावल छूटे तो छूटे अगली फ्लाईट तो नहीं छूटनी चाहिए.. जैसे ही सुरक्षा जांच कि लाइन में लगे एक वर्दीधारी मुझे खोजता हुआ आया.. मन में आया चावल तो ले लिए अब क्या दाल भी लोगे..पर बन्दा शरीफ था.. बोला "मिस्टर मोहनोत, अगर आपके आप वक्त है तो मेरे साथ वापस चलो, आपके चावल लौटाने है" घड़ी देखी पता चला फ्लाईट में अभी ६० मिनिट है.. उसके साथ जाया जा सकता है... रास्ते में बंदे में पांच बार माफी मांगी... बोला "सोरी मैंने ध्यान नहीं दिया, आप हैती जा रहें है. वहां चावल ले जा सकते है" बहुत अदब से बात कि, चावल लौटाए.. वापसी में दरवाजे तक छोड़ने आया.. मैं पुरे रास्ते सोचता रहा कि ये लोग कितने प्रोफेशनल है... गलत होने भी नही देते और गलत करते भी नहीं है... और ये ही चीजें भारत और अमेरिका में फर्क करती है...

Thanks Anna for your help

Thanks Anna for your help
Some random thoughts)


Today I want to thank Anaa for his help, he did a favor to me, and he did something which I couldn’t do myself for years. I always wanted this to happen; this was always one of my favorite topics for debate. Yes I am talking about “corruption”. I always feel that’s as a main problem but I couldn’t fight it myself. How can I fight with this BIG issue alone (by the way it was not so big when I started thinking about it, but it grew with my thoughts). I am a common man, lots for thing to do in life, so I never had time to raise my voice against corruption and to be honest with you I never had enough courage to raise my voice.. ok let’s not make it a ‘political correct statement’ today I want to confess even I was not having moral to raise my voice. I was always part of corrupt system and I took all the advantages from the system wherever I could take any. But I am happy now… Anna come forward and stood bravely.. thanks Anna for fighting MY battle…


So now we will have a corruption free society!! A corruption free nation!! What an achievement 5 days of strike and we got a transformed NATION. I never thought this can be so easy. Anna you deserve “Bharat Ratna”. I will take part in candle march to demand ‘Bharat Ratna’ for you. I Promise!!


But, but but….… who is responsible for corruption? ISI is responsible for that? or its China’s new plan to destabilize India? Is it Lashkar E Toyba or Jash Mohamaad? May be illegal Bangladeshi Immigrant or its Western conspiracy against India? Ohh so many outsides to Blame for many other things but NOT for corruption….


WE the people of India are SOLE responsible for corruption… We the people of India are politician, we are the bureaucrats, we are the Babus, we are the police, we are the civil servants.. we produce them.. they are born in our homes, they got education in our schools, they learn from our society.. we elect them, we pay money for selection in govt. services, we approach our know to speed up our task (on the cost of others)….

I am always busy… having a little or no time to spend in a long queue… I will try to find out any know or any known of my known and do my best to get things out of my turn and I feel PROUD of my contacts and approach…
I never ask my neighbor who is a public servant with a monthly salary of 15,000 rupees “How you can afford a big luxury car and few other flats in the city?” I see him going every day and wish If I could have a govt job?
We want corruption to go but please start with others. If A is corrupt, B is corrupt and I have all right to be corrupt. So start from A, B, C…. and come to me only if you are successful with all of them.. I want to be last.


I am unable to differentiate between a frauds of 2,00,00,00,00,000 (20,000 crores) or paying 20 rupees extra for buying a cinema ticket in black.
This is just a tool to do something after corruption happens…. It is reactive not preventive…. It may target corrupt (and dumb, because intelligent will find a mechanism to escape) politician/bureaucrats. This will NOT stop corruption.. this will not spot producing corrupt people..
“India against corruption” or “corruption free India” needs to wait.. wait for few more years.. decades.. let me achieve my personal goal.. then one day I will stand FIRM and say “NO” to corruption.. please wait till that time.. But Thanks Anna.. thanks again.. we are grateful to you.. hope you will understand my problem.

हूँ अपनी प्रतिक्रिया का इंतजार कर....

(हमेशा स्पैम मेल अंग्रेजी में मिलती थी.. आज पहली बार हिंदी में मिली है... मुझे इस प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं है... अगर आप को है तो संपर्क कर लें.)

एमआर. कोफी नाना
शाखा प्रबंधक
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक
KUMASI शाखा घाना.

नमस्ते प्रिय,

              मेरा नाम कोफी नाना है, मैं अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक शाखा Kumasi घाना के शाखा प्रबंधक हूँ. मैं इंटरनेट के माध्यम से अपनी खोज के दौरान आपकी जानकारी मिली. मैं 46years की उम्र के सुंदर हूँ और 3 बच्चों के साथ शादी कर ली. यह आप को सुनने के लिए है कि मैं शांति के एक आदमी हूँ और मैं समस्या नहीं चाहता ब्याज सकता है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कैसे आप इस बारे में लग रहा है क्योंकि आप डबल मन हो सकता है. लेकिन मैं आपको लगता है कि यह असली है और आप मेरे साथ इस लेन - देन करने के बाद पछतावा नहीं जा रहे हैं कह रहा हूँ. मैं केवल आशा है कि हम एक दूसरे की सहायता कर सकते हैं. लेकिन अगर तुम इस व्यापार नहीं करना चाहते हैं कृपया इसे भूल जाओ और मैं तुम्हें फिर से संपर्क नहीं करेगा प्रदान करते हैं.

              मैं एक वित्तीय अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक Kumasi घाना के क्षेत्रीय प्रबंधक के रूप में है कि हम दोनों को लाभ होगा लेनदेन, पैक किया है. यह मेरे लिए एक वित्तीय रिपोर्ट में राजधानी (अकरा, घाना में अपने मुख्य कार्यालय को भेज कर्तव्य प्रत्येक वर्ष के अंत में) है. पिछले वर्ष 2009 की रिपोर्ट पिछले साल के अंत के पाठ्यक्रम पर, मुझे पता चला कि मेरी शाखा जिसमें मैं मैनेजर हूँ 3,750,000 [डॉलर 3, 750.000.00] जो मेरे सिर कार्यालय इसकी जानकारी नहीं है बनाया और के बारे में पता होना कभी नहीं होगा. मैं के बाद से जगह हम क्या किसी भी लाभार्थी के बिना उचंत लेखा फोन पर इस निधि.

              बैंक के एक अधिकारी मैं सीधे इस निधि से कनेक्ट नहीं किया जा सकता है, तो यह मुझे तुम हमारे लिए काम करने के लिए संपर्क करने की जानकारी दी है, ताकि आप की सहायता के लिए और अपने बैंक खाते में हमारे लिए इस कोष में हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं. आप मतलब जबकि कुल फंड का 35% है, तो ध्यान दें वहाँ व्यावहारिक रूप से कोई जोखिम भी शामिल हैं, यह बैंक स्थानान्तरण करने के लिए बैंक की जाएगी, मैं तुम्हें इस निधि के साथ जो जमा किया के मूल जमाकर्ता के रूप में दावा स्टैंड से की जरूरत है हमारे शाखा इतना है कि मेरे सिर के कार्यालय अपने नामित बैंक खाते में स्थानांतरण आदेश कर सकते हैं.

              यदि आप यह मेरे साथ काम करने की पेशकश स्वीकार करते हैं, मैं इसे बहुत ज्यादा के रूप में जल्दी के रूप में मैं सराहना करेंगे अपनी प्रतिक्रिया मैं तुम्हें कैसे हम इसे सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकते हैं पर विवरण दे देंगे प्राप्त करते हैं. कृपया मुझे इस ईमेल पते के साथ संपर्क करें: kofi.nana55 @ yahoo.com

सर्वश्रेष्ठ सादर
श्री कोफी नाना

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आदि यहाँ है...

क्या काबुल में भी गधे होते है...

पॉल बाबा
पॉल के चक्कर में पुरी दुनिया घूम रही है.... पॉल बहुत बड़ा भविष्यवक्ता हो गया... अमिताभ से लेकर तमाम बड़ी हस्तियाँ उसके गुणगान गाने लगी.. है कौन ये पॉल.. एक ओक्टोपस न.. कुछ इशारा किया सही हो गया.. कभी गलत भी होगा.. तुक्का कैसे लगा.. कुछ पता नहीं.. पर तथाकथित विकसित देश भी इस झांसे में आ गए... हैरानी होती है भारत को सपेरों का देश कहने वाले यूरोपीय आज २१ वीं सदी में एक ओक्टोपस की चर्चा कर रहें है.... और तरस आता है जर्मनी पर उसकी भविष्यवाणी सही होने पर उसे बेचारे ओक्टोपस को मरने मारने पर उतारू है.. ये सब तुम्हारा की हो किया धरा है.. बेचारे को समुद्र से पकड़ लाये... कुछ हिलाना डुलना और डिब्बे पर बिठाना सीखा दिया...  उसके किसी डिब्बे पर बैठने के अपने मायने तय कर दिए.. जय हो...
काबुल में गधे..

सपेरों के देश भारत में ये सदियों से हो रहा है.. पूरा "विज्ञान?" बना है.. हर तरह की भविष्वाणी करते है... ज्यादातर मनुष्य करतें है.. कुछ तोते भी है..

पॉल को देख दो बातें समझ आती है...
१. भारत ज्यादा विकसित देश है... यहाँ कम से कम इंसान की बातों का भरोसा किया जाता है...
२. काबुल में भी गधे होते है....


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आदि की बातें यहाँ है...

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www.blogvani.com चिट्ठाजगत