युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

दो किलो बासमती चावल

भारत से दो किलो बढ़िया बासमती चावल लेकर चले हैती की और.. अमेरिका में कस्टम अधिकारियों द्वारा रोक लिए गए.. बोला चावल ले जाना मना है.. बहस की कोई गुंजाईश नहीं.. भारी मन से चावल देकर बैग हल्का किया.. आगे चल बैग अगली फ्लाईट में चेक इन के लिए दे दिए.. गम दो किलो चावलों का था और ये भी कि आगे और चावल लाने का रास्ता भी बंद.. सोचते हुए दो मंजिल ऊपर चढ़ गए.. चावल छूटे तो छूटे अगली फ्लाईट तो नहीं छूटनी चाहिए.. जैसे ही सुरक्षा जांच कि लाइन में लगे एक वर्दीधारी मुझे खोजता हुआ आया.. मन में आया चावल तो ले लिए अब क्या दाल भी लोगे..पर बन्दा शरीफ था.. बोला "मिस्टर मोहनोत, अगर आपके आप वक्त है तो मेरे साथ वापस चलो, आपके चावल लौटाने है" घड़ी देखी पता चला फ्लाईट में अभी ६० मिनिट है.. उसके साथ जाया जा सकता है... रास्ते में बंदे में पांच बार माफी मांगी... बोला "सोरी मैंने ध्यान नहीं दिया, आप हैती जा रहें है. वहां चावल ले जा सकते है" बहुत अदब से बात कि, चावल लौटाए.. वापसी में दरवाजे तक छोड़ने आया.. मैं पुरे रास्ते सोचता रहा कि ये लोग कितने प्रोफेशनल है... गलत होने भी नही देते और गलत करते भी नहीं है... और ये ही चीजें भारत और अमेरिका में फर्क करती है...

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