युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

Why I Wrote a Book on How NOT to Lead

A short story about office truths, satire, and a little psychology

Back in 1969, a book called The Peter Principle came out with a single brutal idea:

“In a hierarchy, every employee tends to rise to their level of incompetence.”

It was both funny and sad because it was true.
Almost every office I’ve worked in had a living example.

Over the years, I kept thinking, what if we wrote more honestly about leadership?


Not in a lecture-heavy, buzzword-filled way.

But the way it actually looks when things go wrong, when people get promoted for the wrong reasons, when meetings become cover-ups, when leadership means doing everything except listening.

That’s how this book was born.

How Not to Lead is my first book and possibly my most honest one.

It’s not a business manual.
It’s not pretending to be wise.
It’s just what I’ve seen, heard, and lived through over 30 years working with leaders across humanitarian missions, corporate offices, boardrooms, and bureaucracies.

There were moments when I laughed.
Moments when I stared in disbelief.
Moments when I thought, “Wow… that’s a leadership lesson no one will put in a textbook.”

So, I started collecting those moments.
One line at a time.

The Book in One Line:

A funny, illustrated coffee table book about how not to manage people.

You’ll find:

  • One quote per page

  • Simple, bold illustrations

  • Truths that are painful, hilarious, or both

Some favorites?



“The best way to avoid looking dumb - Ban all questions.”
“The best way to show strength - Shut everyone up.”
“The best way to succeed - Brag about yourself nonstop.”

Sound familiar?


Who is this book for?

If you’ve ever:

  • Sat in a meeting, wondering why it exists

  • Watched a good colleague get ignored

  • Been promoted, demoted, or micromanaged without warning

  • Or simply needed a reason to laugh at your workplace instead of cry...

Then this book is for you.

Why Satire?

Because sometimes, telling people what not to do is more powerful than telling them what to do.

This book borrows from the tradition of satire in workplace writing — like Dilbert, The Peter Principle, and countless management memes that feel a little too accurate.

It uses humor to create distance.
That way, we can see things clearly… and maybe change something along the way.


Grab Your Copy

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Perfect for your desk, your team, your boss — or that one colleague who really needs it.

Read it. Gift it. Laugh nervously.


Ranjan Mohnot



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मरना है तो लड़ कर मरना है

लोग बहुत है, शोर बहुत है
यहाँ टँगाडी खोर बहुत है
वो तोड़ना तुम्हारा हौसला चाहते है
क्यो दे हम उन्हें जो वो चाहते है

चाहते वो तुमको चुप करना है
कोई काट नही तुम्हारी बातों का है
है मैदान बड़ा डरना अब क्या है
मरना है तो लड़ के मरना है।

मध्यम मध्यम क्या होता है?
क्या सच का भी कोई मध्यम होता है?
बात टोन से बहुत गहरी है,
ये कुछ औऱ नहीं उनकी मक्कारी है।

क्या तूने कुछ गलत किया है?
क्या तू अपने से शर्मिंदा है?
ये बात नहीं तो क्यों डरता है?
क्या तू लड़ने से डरता है?

सोच की तेरा धेय्य क्या है
क्या तू उनको खुश रखने को जीता है?
लक्ष्य बड़ा है तो कुर्बानी भी बड़ी है
क्या तू कुर्बानी से डरता है?

रख भरोसा तू अपनी मेहनत पर
कर्म किये जा अपने भुज बल पर
शिकन न आने दे अपने चेहरे पर
रह अटल अडिग अपनी राहों पर

मत दे उसे जो वो चाहता है
मरना है तो लड़ कर मरना है

29 Aug 2020







आदि यहाँ है...

सच ही तो कहा था मैंने।



माफ कीजिये आपको बुरा लगा,
सच ही तो कहा था मैंने।


जो है, जैसा है, बिना लग लपेट के
रखा था मैंने
सच ही तो कहा था मैंने।


अपनी बात रखने की आजादी
कड़े संघर्षों से पाई है मैने
सच ही तो कहा था मैंने।


आपको लगता है कि आप बड़े है,
पर बराबरी हक संविधान से पाया है हमनें
सच ही तो कहा था मैंने।


आप चाहते है माफी मांग लू मैं
आपके ईगो को हर्ट किया है मैंने
सच ही तो कहा था मैंने।


सच्चाई के लिए खड़े रहना
गांधी से सीखा है मैंने
माफी मांगकर अन्याय के आगे नहीं झुकूंगा मैं
सच ही तो कहा था मैंने

तो दे दीजिए सजा
जो आपको लगे कानूनी
जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाया है मैंने
सच ही तो कहा था मैंने


सत्यमेव जयते।
जय हिंद

22 Aug 2020






आदि यहाँ है...

आज़ादी के नए गीत रचें।


देश भक्ति के कई गीत लिखे,
हर दौर में हर जज्बे में लिखे।


देश गुलाम था, अग्रेजो से परेशान था,
हमने कुर्बानी के गीत लिखे,
कौम में जोश जज्बे लाने को
कवियों ने नए गीत रचे।


देश आजाद हुआ,
नई चुनौतियों से साक्षात हुआ
एकता और अखंडता वक्त जरूरत बनी
सभी को एक तार में गुथने को
कवियों ने नए गीत रचे।


60-70 का दशक आया,
चीन और पाक की नापाक
हरकतों से सामना हुआ
लहू की जरूरत आन पड़ी थी
माटी का कर्ज चुकाने को
युवाओं को आगे लाने को
कवियों ने नए गीत रचे।


समय नया आया है
चुनौतिया नई लाया है
देशभक्ति के जज्बे का रूप
नया गढ़ने का वक्त आया है
गीत नए लिखने का वक्त आया हैं।



हुक्म मानेे जनता ने कई सालों तक
अब हुक्मरानों की जबाबदारी तय करने 

का वक्त आया है।
गीत नए लिखने का वक्त आया हैं।



हो गई जनता साक्षर बहुत
अब जनता को शिक्षित करने
का बक्त आया है
गीत नए लिखने का वक्त आया है।



लोक तंत्र का चौथा खम्बा है मीडिया
अब भटकने लगा है वो अपनी सीढिया
ये जिम्मेदारी हमे अपने कंधे पर
लेने का वक्त आया है
गीत नए लिखने का वक्त आया है।


सभी का खून पसीना लगा है
इस आजादी को पाने में
अब आजादी को बचाने का
वक्त आया है

गीत नए लिखने का वक्त आया है।


15 August 2020






आदि यहाँ है...

पर बाकी सब ठीक है।


कल सुबह गाँव में टहलते
अपने घर के बाहर मंजन करते
मुझे पुराना दोस्त सुरेन्द्र मिल गया
मैं बोला क्या हाल सुरेन्द्र
बोला कुछ नहीं भैय्या
नौकरी चली गई घर बैठा हूँ अब,
पर बाकी सब ठीक है।


बहुत बुरा हुआ मैं बोला
कॅरोना ने हालत पतली कर दी
सुरेन्द्र बोला
हालत पतली तो नोट बंदी ने की
और रही सही कसर gst ने पूरी कर दी
फाके पड़ रहे अब खाने के
पर बाकी सब ठीक है।

घर के बाहर खड़ी
धूल छानती पड़ी थी सुरेन्द्र की कार
मैं बोला कपड़ा मारा करो यार
सुरेन्द्र बोला
भाई साहब तेल हो गया है अस्सी
इसकी क़िस्त ही पड़ रही है भारी
हालात खराब है
पर बाकी सब ठीक है।

इतने में मुझे याद आया
सुरेन्द्र ने बुक किया था फ्लेट अपना
मैंने पूछा क्या हाल उसका
ना पूछो भैया छः साल हो गए,
किश्ते भी भर रहा हूँ और किराया भी
पता नहीं कब मिलेगा वो
बचत सुख चुकी है अब
पर बाकी सब ठीक है।

मैं बोला चिंता न कर
अनलॉक हो गया है अब
जल्द ही वापस लग जायेगी नौकरी अब
सुरेन्द्र बोला, अखबार नहीं पढ़ते हो भैय्या
GDP भी हो गई नेगेटिव इस बार
नौकरी की अब आस नहीं
पर बाकी सब ठीक है।

सुरेंद्र का हाल सुन
दिल थम सा गया
बात बदलने कि आस में
मैंने पूछा तेरे चाचा के क्या हाल है?
सुरेंद्र बोला, किसका हाल बताऊँ,
महीनो से बोलचाल बंद है,
सोशल मीडिया के विवाद अब रिश्‍तों मे आ गये है.
सब रिश्ते बिखर गये है
पर बाकी सब ठीक है।

इसके बाद कुछ जबाब देते न बना
राम राम बोल के सुरेंद्र को
मैं आगे बढ़ लिया।


1 Sep 2020


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आदि यहाँ है...

मोहताज नहीं मैं तेरा

कण कण में समाया हूं मैं
हर सांस में समाया हूँ मैं
मोहताज नहीं मैं तेरा


हर जर्रे में मैं
हर पेड़, पत्ती, शाखा में मैं
हर ईंट, पत्थर, बजरी में मैं
मोहताज नहीं मैं तेरा


हर पक्षी में मैं
हर जीव में मैं
हर जीवन मृत्यु में मैं
मोहताज नहीं मैं तेरा


ये जग मेरा
ये सागर अम्बर भी मेरा
ये धरती और पाताल भी मेरा
मोहताज नहीं मैं तेरा

तू दंभ न कर, घमंड न कर
मेरे लिए घर की चिंता न कर
तू मुझसे है, मैं तुझसे नहीं
मोहताज नहीं मैं तेरा


रंजन, अगस्त 7, 2020


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आदि यहाँ है...

इण्डिया अगेंस्ट करप्शन - IAC

आज इण्डिया अगेंस्ट करप्शन कि और कमेटी से कासमी साहेब को निकाल दिया गया.... कासमी जी पर आरोप है कि वो मीटिंग में ऑडियो/विडीयो रिकोर्डिंग कर रहे थे....

पहली बार में अजीब लगा... क्या ये वो ही समूह है जो लोकपाल बिल कि ड्राफ्टिंग कमिटी कि बैठकों कि रिकोर्डिंग चाहता था... क्या ये वो ही समूह है जो सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता कि वकालत करता है...  आप चाहते है कि पारदर्शिता हो.. तो वो ही आप अपने समूह पर लागू क्यों नही कर सकते... सुविधानुसार नैतिक मूल्यों का चुनाव कर दोहरा मापदंड क्यों?

इसी सिलसिले में कोर कमिटी के मीटिंग मिनिट्स खोजे तो पता चला कि मीटिंग मिनिट्स कुछ इस मोहतरमा कि पौशाक जैसे है... जिसमें छुपाने कि कोशिश ज्यादा है और दिखाने कि कम.... आठ घंटों कि बैठक के मिनिट्स डेढ़ पन्नों में समेट कर छाप रस्म आदायगी कर कि गई....



मीटिंग मिनिट्स होने चाहिए कुछ इस तरह है..... दिखाई ज्याद दे, छुपाया कम जाए... और बिल्कुल हॉट....


निर्मल बाबा फ्रोड क्यों?

निर्मल बाबा फ्रोड क्यों? 


अभी तक जो बातें सामने आई है क्या वो निर्मल जीत सिंह उर्फ निर्मल बाबा को फ्रोड कहने के लिए काफी है.... 

  1. निर्मल जीत सिंह ने विज्ञापन देकर समागम में लोगो को बुलाया.. लोगों ने बैक में जा कर अपनी इच्छा से पैसे जमा करवाए..... पहली नजर में शायद ये एक मात्र बाबा है जिसका सारा कारोबार सफेद धन का है... 
  2. बाबा पिछले पांच साल से समागम कर रहा है... सारे चेनल उसका कार्यक्रम दिखाते है.... पूरा पैसा लेकर... बाबा कि बातें में और उपायों में कोई परिवर्तन नहीं आया... फिर ये अचानक बाबा फ्रोड कैसे हो गया... क्या सभी पांच साल से सो रहे थे... ये साधारण सी बात समझने के लिए इतना वक्त लगा... या जब तक कमाना था कमा लिया और जब हवा का रुख बदला तो न्यूज रिपोर्टरों ने अपना मिजाज बदल दिया.. 
  3. बाबा ने करोड़ों कमाए तो ये करोड़ों रुपये लाखों लोगों ने दिए.. और एक दिन में नहीं दिए कई शहरों के लोगों ने दिए... कई सालों तक दिए.. कितनों ने फ्रोड कि शिकायत दर्ज करवाई? 
  4. बाबा ने जो पैसे लिए वो एंट्री फीस के रूप में लिए.. ये कोई दान और चन्दा नहीं है... बाबा ने अपनी कमाई पर टेक्स दिया (अभी तक कोई टेक्स चोरी का मामला नहीं आया) फिर बाबा अपने पैसे से होटल ख़रीदे या फ्लेट.. किसी को क्या लेना देना... 
  5. बाबा कौन है? कहाँ से आया है? क्या करता था? पैसा देने से पहले किसी ने जानने कि कोशिश की? निर्मल बाबा आसमान से नहीं टपका, ये हमारी सोच और हमारी व्यवस्था कि ही उपज है.. 



हम इसी तरह हमारे ‘बाबाओं’ का चुनाव करते है... हम इसी तरह हमारे नेताओं को चुनते है... हम इसी तरह कम कीमत में चमत्कार के सहारे सफलता चाहते है... हम इसी तरह अपने स्वार्थों के लिए वोट देते है..... हम इसी तरह कुछ दिन के लिए हल्ला मचातें है... हम इसी तरह चाहते है कि शुरुआत कोई और करें.... 


निर्मल बाबा बुद्धिमान नहीं, हम मुर्ख और स्वार्थी है... निर्मल बाबा न पहला उदाहरण है न ही आखिरी... अगर ध्यान से देखेगें तो शायद लाखो ऐसे बाबा मिलेगें और करोड़ों ऐसे भक्त.... 


“बाबाजी” कृपा बनाए रखें....

Love and hate relationship


I love chewing gum, they are sweet and refreshing when I put them in my mouth.. I love them for 10-15 minutes… after that they lose taste and I wanted to throw them….. but being lazy it’s hard for me to walk and being ‘civilized’ I can’t throw them where I am sitting… and as enjoyed them for only 10-15 min I want to have more out of them… so I chew them for another 15-20 minutes… new my jaw started pain… I want to throw it asap… but because now it’s in my mouth for about 30 minutes… I developed a relationship…. and because of this love I somehow spent 30 more minutes with it…… now my jaws are really tired now… pain is unbearable…and the chewing gum became completely tasteless… I started hating it…. I spent another 20-30 minutes in this hate relationship… and after that… I say myself enough is enough…. No more suffering… I concur my laziness and put my emotions on side…. stand up and walk to the dustbin…and say a final good bye to my lovely chewing gum…

(it’s a true love story, partly inspired by a dialogue from the movie Tees Maar Khan)

दो किलो बासमती चावल

भारत से दो किलो बढ़िया बासमती चावल लेकर चले हैती की और.. अमेरिका में कस्टम अधिकारियों द्वारा रोक लिए गए.. बोला चावल ले जाना मना है.. बहस की कोई गुंजाईश नहीं.. भारी मन से चावल देकर बैग हल्का किया.. आगे चल बैग अगली फ्लाईट में चेक इन के लिए दे दिए.. गम दो किलो चावलों का था और ये भी कि आगे और चावल लाने का रास्ता भी बंद.. सोचते हुए दो मंजिल ऊपर चढ़ गए.. चावल छूटे तो छूटे अगली फ्लाईट तो नहीं छूटनी चाहिए.. जैसे ही सुरक्षा जांच कि लाइन में लगे एक वर्दीधारी मुझे खोजता हुआ आया.. मन में आया चावल तो ले लिए अब क्या दाल भी लोगे..पर बन्दा शरीफ था.. बोला "मिस्टर मोहनोत, अगर आपके आप वक्त है तो मेरे साथ वापस चलो, आपके चावल लौटाने है" घड़ी देखी पता चला फ्लाईट में अभी ६० मिनिट है.. उसके साथ जाया जा सकता है... रास्ते में बंदे में पांच बार माफी मांगी... बोला "सोरी मैंने ध्यान नहीं दिया, आप हैती जा रहें है. वहां चावल ले जा सकते है" बहुत अदब से बात कि, चावल लौटाए.. वापसी में दरवाजे तक छोड़ने आया.. मैं पुरे रास्ते सोचता रहा कि ये लोग कितने प्रोफेशनल है... गलत होने भी नही देते और गलत करते भी नहीं है... और ये ही चीजें भारत और अमेरिका में फर्क करती है...

Thanks Anna for your help

Thanks Anna for your help
Some random thoughts)


Today I want to thank Anaa for his help, he did a favor to me, and he did something which I couldn’t do myself for years. I always wanted this to happen; this was always one of my favorite topics for debate. Yes I am talking about “corruption”. I always feel that’s as a main problem but I couldn’t fight it myself. How can I fight with this BIG issue alone (by the way it was not so big when I started thinking about it, but it grew with my thoughts). I am a common man, lots for thing to do in life, so I never had time to raise my voice against corruption and to be honest with you I never had enough courage to raise my voice.. ok let’s not make it a ‘political correct statement’ today I want to confess even I was not having moral to raise my voice. I was always part of corrupt system and I took all the advantages from the system wherever I could take any. But I am happy now… Anna come forward and stood bravely.. thanks Anna for fighting MY battle…


So now we will have a corruption free society!! A corruption free nation!! What an achievement 5 days of strike and we got a transformed NATION. I never thought this can be so easy. Anna you deserve “Bharat Ratna”. I will take part in candle march to demand ‘Bharat Ratna’ for you. I Promise!!


But, but but….… who is responsible for corruption? ISI is responsible for that? or its China’s new plan to destabilize India? Is it Lashkar E Toyba or Jash Mohamaad? May be illegal Bangladeshi Immigrant or its Western conspiracy against India? Ohh so many outsides to Blame for many other things but NOT for corruption….


WE the people of India are SOLE responsible for corruption… We the people of India are politician, we are the bureaucrats, we are the Babus, we are the police, we are the civil servants.. we produce them.. they are born in our homes, they got education in our schools, they learn from our society.. we elect them, we pay money for selection in govt. services, we approach our know to speed up our task (on the cost of others)….

I am always busy… having a little or no time to spend in a long queue… I will try to find out any know or any known of my known and do my best to get things out of my turn and I feel PROUD of my contacts and approach…
I never ask my neighbor who is a public servant with a monthly salary of 15,000 rupees “How you can afford a big luxury car and few other flats in the city?” I see him going every day and wish If I could have a govt job?
We want corruption to go but please start with others. If A is corrupt, B is corrupt and I have all right to be corrupt. So start from A, B, C…. and come to me only if you are successful with all of them.. I want to be last.


I am unable to differentiate between a frauds of 2,00,00,00,00,000 (20,000 crores) or paying 20 rupees extra for buying a cinema ticket in black.
This is just a tool to do something after corruption happens…. It is reactive not preventive…. It may target corrupt (and dumb, because intelligent will find a mechanism to escape) politician/bureaucrats. This will NOT stop corruption.. this will not spot producing corrupt people..
“India against corruption” or “corruption free India” needs to wait.. wait for few more years.. decades.. let me achieve my personal goal.. then one day I will stand FIRM and say “NO” to corruption.. please wait till that time.. But Thanks Anna.. thanks again.. we are grateful to you.. hope you will understand my problem.

हूँ अपनी प्रतिक्रिया का इंतजार कर....

(हमेशा स्पैम मेल अंग्रेजी में मिलती थी.. आज पहली बार हिंदी में मिली है... मुझे इस प्रस्ताव में दिलचस्पी नहीं है... अगर आप को है तो संपर्क कर लें.)

एमआर. कोफी नाना
शाखा प्रबंधक
अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक
KUMASI शाखा घाना.

नमस्ते प्रिय,

              मेरा नाम कोफी नाना है, मैं अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक शाखा Kumasi घाना के शाखा प्रबंधक हूँ. मैं इंटरनेट के माध्यम से अपनी खोज के दौरान आपकी जानकारी मिली. मैं 46years की उम्र के सुंदर हूँ और 3 बच्चों के साथ शादी कर ली. यह आप को सुनने के लिए है कि मैं शांति के एक आदमी हूँ और मैं समस्या नहीं चाहता ब्याज सकता है, लेकिन मुझे नहीं पता कि कैसे आप इस बारे में लग रहा है क्योंकि आप डबल मन हो सकता है. लेकिन मैं आपको लगता है कि यह असली है और आप मेरे साथ इस लेन - देन करने के बाद पछतावा नहीं जा रहे हैं कह रहा हूँ. मैं केवल आशा है कि हम एक दूसरे की सहायता कर सकते हैं. लेकिन अगर तुम इस व्यापार नहीं करना चाहते हैं कृपया इसे भूल जाओ और मैं तुम्हें फिर से संपर्क नहीं करेगा प्रदान करते हैं.

              मैं एक वित्तीय अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक बैंक Kumasi घाना के क्षेत्रीय प्रबंधक के रूप में है कि हम दोनों को लाभ होगा लेनदेन, पैक किया है. यह मेरे लिए एक वित्तीय रिपोर्ट में राजधानी (अकरा, घाना में अपने मुख्य कार्यालय को भेज कर्तव्य प्रत्येक वर्ष के अंत में) है. पिछले वर्ष 2009 की रिपोर्ट पिछले साल के अंत के पाठ्यक्रम पर, मुझे पता चला कि मेरी शाखा जिसमें मैं मैनेजर हूँ 3,750,000 [डॉलर 3, 750.000.00] जो मेरे सिर कार्यालय इसकी जानकारी नहीं है बनाया और के बारे में पता होना कभी नहीं होगा. मैं के बाद से जगह हम क्या किसी भी लाभार्थी के बिना उचंत लेखा फोन पर इस निधि.

              बैंक के एक अधिकारी मैं सीधे इस निधि से कनेक्ट नहीं किया जा सकता है, तो यह मुझे तुम हमारे लिए काम करने के लिए संपर्क करने की जानकारी दी है, ताकि आप की सहायता के लिए और अपने बैंक खाते में हमारे लिए इस कोष में हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं. आप मतलब जबकि कुल फंड का 35% है, तो ध्यान दें वहाँ व्यावहारिक रूप से कोई जोखिम भी शामिल हैं, यह बैंक स्थानान्तरण करने के लिए बैंक की जाएगी, मैं तुम्हें इस निधि के साथ जो जमा किया के मूल जमाकर्ता के रूप में दावा स्टैंड से की जरूरत है हमारे शाखा इतना है कि मेरे सिर के कार्यालय अपने नामित बैंक खाते में स्थानांतरण आदेश कर सकते हैं.

              यदि आप यह मेरे साथ काम करने की पेशकश स्वीकार करते हैं, मैं इसे बहुत ज्यादा के रूप में जल्दी के रूप में मैं सराहना करेंगे अपनी प्रतिक्रिया मैं तुम्हें कैसे हम इसे सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकते हैं पर विवरण दे देंगे प्राप्त करते हैं. कृपया मुझे इस ईमेल पते के साथ संपर्क करें: kofi.nana55 @ yahoo.com

सर्वश्रेष्ठ सादर
श्री कोफी नाना

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आदि यहाँ है...

क्या काबुल में भी गधे होते है...

पॉल बाबा
पॉल के चक्कर में पुरी दुनिया घूम रही है.... पॉल बहुत बड़ा भविष्यवक्ता हो गया... अमिताभ से लेकर तमाम बड़ी हस्तियाँ उसके गुणगान गाने लगी.. है कौन ये पॉल.. एक ओक्टोपस न.. कुछ इशारा किया सही हो गया.. कभी गलत भी होगा.. तुक्का कैसे लगा.. कुछ पता नहीं.. पर तथाकथित विकसित देश भी इस झांसे में आ गए... हैरानी होती है भारत को सपेरों का देश कहने वाले यूरोपीय आज २१ वीं सदी में एक ओक्टोपस की चर्चा कर रहें है.... और तरस आता है जर्मनी पर उसकी भविष्यवाणी सही होने पर उसे बेचारे ओक्टोपस को मरने मारने पर उतारू है.. ये सब तुम्हारा की हो किया धरा है.. बेचारे को समुद्र से पकड़ लाये... कुछ हिलाना डुलना और डिब्बे पर बिठाना सीखा दिया...  उसके किसी डिब्बे पर बैठने के अपने मायने तय कर दिए.. जय हो...
काबुल में गधे..

सपेरों के देश भारत में ये सदियों से हो रहा है.. पूरा "विज्ञान?" बना है.. हर तरह की भविष्वाणी करते है... ज्यादातर मनुष्य करतें है.. कुछ तोते भी है..

पॉल को देख दो बातें समझ आती है...
१. भारत ज्यादा विकसित देश है... यहाँ कम से कम इंसान की बातों का भरोसा किया जाता है...
२. काबुल में भी गधे होते है....


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आदि की बातें यहाँ है...

शादी और मिडिया

गौरव कुमार प्रजापति की पोस्ट "धोनी की शादी में पत्रकारों की फजीहत" पर टिपण्णी ओसत से ज्यादा हो गई तो सोचा इसकी एक पोस्ट बना देते है..:)

"अगर मिडिया को लगता है उनके साथ नाइंसाफी हुई तो एक लाइन में खबर दिखा/चला देते.."सूत्रों के अनुसार धोनी की शादी है" और दो लाइन खर्च करनी हो तो जोडते.."मिडिया को इसका कवरेज करने की अनुमति नहीं दी जा रही"
मीडिया क्यों जिद्द पर अड़ा रहता है... की हर खबर लाइव दिखायेगें.. सबसे पहले.. धोनी की शादी कोई जनउत्सव या मेला नहीं.. उसका व्यकितगत मसला है...  शादी करने के लिए उसने देश से पैसा नहीं लिया..
धोनी ने मीडिया का इस्तेमाल किया तो मीडिया ने भी किया.. ये तो आपस का व्यवहार है... किसी ने किसी पर कोई अहसान नहीं किया.. ये तो शुद्ध व्यापार है..
अगर फोटो की अनुमति नहीं है.. तो क्यों चोरी छिपे फोटो का जुगाड कर छापी/दिखाई.. ये कहाँ की नैतिकता है... जब भला आदमी कह रहा है की मेरी फोटो मत लो... तो माफ कर दो न.. अगर धोनी की शादी की फोटो नहीं देखेगें तो कौनसी आफत आने वाली है... क्या पता भाई ने फोटो के अधिकार किसी कंपनी को बेच दिए हो..
पत्रकार ऐसी हरकत कर खुद अपना ही मूल्य कम करते है.. सानिया की शादी में भी तो ऐसा ही हुआ...
क्या हम उनकी व्यकितगत जिंदगी को अलग नहीं कर सकते?"
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आदि की स्कुल शुरू हो गई.. आदि की खबरें  यहाँ है...

पानी पी पी कर कोसने का मौक़ा चला गया....

शहीद का अंतिम संस्कार... और मुख्यमंत्री के बेटे का जश्न... कितना सुनहरा मौका था न नेताओं को गाली देने का.. राहुल गांधी और सोनिया गांधी से लेकर सारी कांग्रेस को कोसने का... पर अफसोस.. सारा मजा चला गया.. ये तो भाजपा का नेता निकला..  कोई नहीं फिर मौक़ा मिलेगा...

(फोटो भास्कर से)
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आदि की मीठी बातें यहाँ है...

नया तोहफा.. उनके लिए जो ब्लोगर से प्यार करते है....

वर्ड प्रेस में ब्लॉग ट्रेफिक  मोनिटरिंग की सुविधा पहले से थी. पर ब्लोगर में नहीं.. इसलिए कई बार ब्लोगर वर्डप्रेस से १९ लगता था.. मेरे जैसे लोग जो इस ब्लॉग पर यदाकदा लिखते है.. ट्रेफिक की जानकारी के लिए कहीं पंजीयन करना... कोड लगना... झंझट का काम लगता था.. आज ब्लोगर ने ये कमी दूर करते हुए.. ब्लोगर ड्राफ्ट में stat सुविधा शुरू कर दी.. और मजे की बात ये की आपको कुछ नहीं करना... ये स्वत ही चालु हो गई... ज्यादा जानकारी यहाँ से ले...


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और आदि से मिलना है तो  यहाँ जाएँ......

थाई मसाज (Thai Massage)

सफारी वर्ड में थाई मसाज का आनंद लिया... देखें ये वीडियो....



बाकी बातें आदि के ब्लॉग पर..... यहाँ, यहाँ और यहाँ  है...

(Safari world, Bangkok, Thailand)

बच्चों के लिए ५ खतरनाक चीजें - गेवर टुली

कैसे हम बच्चों को सीखने से रोक देते है.. और कैसे सिखा सकते है.. देखें इस वीडियो में..



आदि ये सब करने वाला है...



Gever Tulley on 5 dangerous things for kids

सफारी वर्ड टिप्स.. (Tips to visit safari world)

बैंकोक घूमने का प्लान है और सफारी वर्ल्ड जा रहे है तो ये टिप्स लेते जाइए... शायद काम आ जाए...

  1. सप्ताह के दिनों में ये सुबह १० बजे खुलता है और छुट्टियों और सप्ताहांत के दिन सुबह ९ बजे... ३६५ दिन खुलता है...जितना जल्द पहुँच जाए उतना बेहतर... 
  2. सफारी वर्ल्ड के दो भाग है... सफारी पार्क और मरीन पार्क.. दोनों के अलग अलग टिकट है..  बेहतर है आप दोनों टिकट लें... चेक करे शायद ट्रेवल एजेंट से टिकट सस्ता मिल जाए ....  हमें ट्रेवल एजेंट ने दोनों टिकट ७५० बाहत में दिए.. सफारी वर्ड में इनकी कीमत ८०० बाहत है.... और टिकट लेने पर गाड़ी भी सस्ती मिली...
  3. मरीन पार्क पहले देख ले.. लगभग सभी शो सुबह होते है.. 
  4. बहुत सारे शो है... (शो के लिए अलग से टिकट नहीं है) पहले से तय कर ले आपको कौनसा/से शो देखना है.... अगर आप सारे शो देखते है तो आप पक्षियों और जन्तुओ को करीब से देखने का मौक़ा खो देगें..
  5. डोल्फिन शो जरुर देखे.. बहुत खूबसूरत है..
  6. जिराफ टेरेस शानदार है.. आप जिराफ को छू सकते है.. खिला सकते है.... कोल्ड ड्रिंक पीकर थकान दूर करते हुए उन्हें निहार सकते है...
  7. Animal Feeding बहुत पोपुलर है.. काफी जगह है.. केवल ४० बाहत लगते है.... 
  8. मरीन पार्क करीब तीन -चार घंटे में घूम सकते है और सफारी पार्क देखने मे करीब एक घंटा लगता है...  सफारी पार्क में अपनी कार से जाए तो बेहतर..वरना २० बाहत में बस का टुअर कर सकते है.. अपनी कार हो तो आप अपनी इच्छा अनुसार कम या ज्यादा समय रुक सकते है.. 
  9. मरीन पार्क से बाहर जाते हुए री-एंट्री स्टाम्प लगवा सकते है... क्या पता फिर आने का मुड बन जाए..
  10. सफारी वर्ल्ड बहुत व्यवस्थित तरीके से बनाया हुआ है..  फोटोग्राफी की प्रचुर संभावनाए है... एक्स्ट्रा बेटरी रखें... 
  11. बाकी थाईलेंड की तरह यहाँ भी शाकाहारी खाने के बहुत कम विकल्प है.. अच्छा ब्रेकफास्ट लेकर आयें..

फोटो देखने के लिए तो आपको आदि के ब्लॉग पर जाना होगा... यहाँ और यहाँ..

(Tag: safari world, safari park marine park, bangkok, Thailand, amazing Thailand)

आल इज वेल...

सुबह से सब परफेक्ट था.. सब कुछ इतना सामान्य की ताज्जुब हो रहा था... एसा भी हो सकता है क्या.. तय वक्त पर तैयार होना.. आदि का अच्छे मुड में होना..बिना ट्रेफिक में फंसे एअरपोर्ट पहुँच जाना... बोर्डिंग कार्ड के लिए कोई कतार नहीं होना.. ६० किग्रा अतिरिक्त वजन होने पर भी एयरलाइन का केवल ३० किलो के लिए पैसे लेना :)... इमिग्रेशन एक मिनिट में हो जाना.. सुरक्षा जांच के लिए कोई लाइन न होना.. फलाईट के लिए २ घंटे का इंतज़ार आराम से बीत जाना.. आदि का प्ले एरिया में मस्ती करते हुए लंच कर लेना.. बोर्डिंग करके टेक आफ से पहले ही आदि का सो जाना.. और अगले तीन  घंटे तक सोते रहना...

खुशफेमिया.. यहीं ख़त्म नहीं हुई.. बैंकाक एअरपोर्ट पर कस्टम जांच बिना निकल जाना (सामान्यतः बैकाक में कस्टम जांच पर सारे सामान का एक्सरे होता है.. ). खैर... इन सभी को इंजॉय करते करते हम अपने नए अपार्टमेन्ट में पहुँच गए.. अपार्टमेंट हमारी अपेक्षाओं के हिसाब से तैयार था.. सब कुछ परफेक्ट..... शायद तूफान के पहले की खामोशी थी.. या कहें की किसी बड़ी विपदा के लिए ऊर्जा बचाने की जुगत थी.. और वो शुरू हुई जब मैंने रिशेप्सन पर पूछा की "मेरे दफ्तर से मेरे लिए एक लिफाफा रखा है, वो दे सकते है?".. पहले जबाब मिला नहीं रखा.. और फिर जबाब मिला की कुछ देर में ढूंढ़ कर देते है.. कुछ देर जब ज्यादा होने लगी तो फिर से पता किया.. और काफी मशक्कत के बाद पता चला की वो खो गया है.. गलती से किसी और को दे दिया.. और वो महाशय उसे पराई अमानत समझ अपार्टमेंट में ही छोड़ कर चले गए और सफाई करने वालो ने अपना फर्ज निभाते हुए उसे कचरे के हवाले कर दिया.. उस लिफाफे में कुछ ख़ास नहीं था.. बस एक वीजा फीस जमा कराने की रसीद थी.. और वीजा इंटरव्यू सुबह ८ बजे था.. और मुझे करीब ७.३० पर पहुँचना था.. बिना रसीद के इंटरव्यू में जा नहीं सकता.. और रविवार रात ९ बजे दूसरी फीस जमा नहीं हो सकती.. सुबह पोस्ट ऑफिस ८ बजे खुलती है.. और ८.३० से पहले दुबारा फीस जमा नहीं हो सकती... वीजा अपोइन्टमेंट विशेष अनुरोध पर मिला था.... और रात के ९ बजे बदल भी नहीं सकता था... समझ पर ताले लग गए.. और रास्ते सारे बंद नजर आने लगे.. स्थानीय साथियों से विकल्प का पता किया तो निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला.... आखिर गूगल बाबा की शरण में गया.. पता चला की एयरपोर्ट पर एक पोस्ट ऑफिस २४ घंटे खुलती है... कुछ उम्मीद नजर आइ और वंहा पर वीसा फीस भी जमा होती है, और शुकून मिला...पर ये पता नहीं चला ली वीजा फीस भी २४ घंटे जमा होती है..... रिशेप्शन पर बताया.. मेनेजर से बात की.. तो वो तुरंत  एयरपोर्ट जाने के लिए तैयार हो गए..(आखिर उन्हें पता था की उन्होंने कितनी भयंकर भूल की है)..तब तक पोस्ट ऑफिस का फोन नंबर भी मिल गया.. और ये भी पता चल गया की फीस भी २४ घंटे जमा होती है... अपार्टमेन्ट स्टाफ पर ज्यादा भरोसा नहीं था तो खुद भी एयरपोर्ट चल दिया.. ४५ मिनट में  एअरपोर्ट पहुंचे.. एअरपोर्ट में जाने के लिए आपको न आई डी प्रूफ चाहिए न ही टिकट... बस रेल्वे स्टेशन की तरह घूस जाओ... १० मिनिट में फीस जमा हो गई.. और करीब रात १२ बजे फिर से अपने ठीकाने पर थे.. समस्या सुलझ गई...

समाधान तो कुछ मिनिटों में हो गया पर तनाव से २-३ घंटो में.. "आल इज वेल..." और "हरी इच्छा प्रबल...." दोहराने से शान्ति जरुर मिली...

एअरपोर्ट से वापस आते हुए मैंने मेरे ब्रह्म ज्ञान  "हर समाधान एक नई समस्या की शुरुआत है..  का विस्तार किया... और उसमें एक और वाक्य जोड़ा ...."और हर समस्या का समाधान होता है"... और अभी तक का ज्ञान ये हुआ...

"हर समाधान एक नई समस्या की शुरुआत है, और हर समस्या का समाधान होता है"

"Every solution is the beginning of new problem and every problem has a solution"

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