२६ नवंबर के बाद भी हम कितने लापरवाह है ये आज सुबह फिर से देखने को मिला.. मुंबई एयरर्पोर्ट के गेट नं १B से प्रवेश करते हुऐ मैने देखा कि CSIF के १०-१२ जवानों को बिना किसी जाँच के एयरपोर्ट में दाखिला मिल रहा है..
ये जवान सुरक्षा कर्मी के पीछे से आराम से प्रवेश कर रहे थे.. मन में शंका हुई.. प्रश्न उठे.. एसा क्यों.. ये सुरक्षाकर्मी इतना विश्वास से कैसे ढील दे रहा है....रहा नहीं गया..और पुछ लिया.. जबाब मिला "ये तो स्टाफ है..." मैने कहा पर कम से कम आई कार्ड तो देख सकते हैं.. क्या पता कोई नापा्क इंसान हो.. कुछ जबाब नहीं मिला...
अपनी चिन्ता वहां के अधिकारी को बताई.. उसने गोपनियता का हवाला दे लापरवाही छुपाने की कोशिश की...
ये् है हमारी सु्रक्षा..
(IT 4147 bay 27 से)
ये तो स्टाफ है..
तीसरी खुशी
सुबह ८ बजे आदि को बाय कर घर से निकला तो याद आया कि कुछ जरुरी पेपर भूल गया हूँ.. फिर से घर लौटा तो लग रहा था आज ८.१० वाली मेट्रो छूट जायेगी.. आज लेट हो जाऊंगा.. जल्दी से पेपर लेकर दौड़ते हुए घर से निकला.. सरपट गाड़ी दौडाया.. जैसे ८.१० कि ट्रेन न मिली तो पता नहीं क्या हो जायेगा... गाड़ी पार्क कर दौडते हुऐ स्टेशन में दाखिल हुआ.. "इंद्रप्रस्थ की और जाने वाली मेट्रो प्लेटफोर्म पर आ रही है.." सुरक्षा जांच में जाते हुऐ ट्रेन की आवाज सुनाई दी... सुरक्षा कर्मी की और गिड़्गीडाते हुए देखा आंखे कह रही थी "भाई जल्दी जाने दे".. वो भी शायद समझ गया.. वंहा से निकला तो दो असंमझस था... स्वचालित सिढ़ी से जाऊ या सिढ़ी से.. देर हो रही थी.. अतः खुद पर भरोसा करना ज्यादा उचित समझा.. सिढ़ी की ओर लपक लिया.. उछलते कुदते सिढी़ चढा.. देखा सामने मेट्रो रानी खड़ी थी.. तुरंत अंदर दाखिल हुआ.. जैसे कोई किला फतह कर लिया.. मन ही मन खुद की प्रसंशा.."वाह प्यारे तुमने तो कर दिखाया.." ये थी आज की पहली खुशी..
जब ट्रेन में दाखिल हुए तो लालच और बढा़... एक सीट मिल जाये तो क्या कहने... आंखे इधर उधर ताकने लगी.. अभी गुजांइश थी.. कुछ सीट खाली थी.. लपक लिये.. देखा वो तो आरक्षित है.. उस पर बैठना नादानी होगी.. कुछ ही देर में उठा दिये जाओगे.. फिर क्या दुसरे कोच में दाखिल हुए.. सामने देखा एक सीट मेरा इन्तजार कर रही थी.. कोई और आये इससे पहने ही तुरंत अपना हक जता दिया.. सीट पर बैठ कर एक गहरी सांस ली.. लगा आज का दिन कितना अच्छा है.. काश उपर वाले से कुछ और मांगा होता!! दौड़ भाग कर सांस फूल चुकी थी.. कुछ गहरी सांस ले खुद को सामान्य किया.. ये थी आज की दुसरी खुशी....
कुछ देर बाद सांस सामान्य हुई तो अखबार की याद आई, थैला देखा तो पता चला की आज तो जल्दबाजी में घर ही भूल आये है.. अब अपने लिये कुछ नहीं बचा था.. तो नजरें ऊपर उठाई.. आस पास देखा.. अचानक नजरें रुक गई.. दुसरे कोच में एक महिला खड़ी थी.. हाथ में दो ढाई साल का बच्चा.. उसकी और देखा.. जब नजर मिली तो "अपनी" सीट से उठते हुऐ उसे "सीट" ऑफर की.. उसके साथ उसके पति भी थे.. तुरंत ही मेरी तरफ बढ़ गये.. इतने में खाली सीट देख कुछ और लोग उस तरफ बढे पर आंख से इशारा कर उन्हें मना किया.. वो मान भी गये.. अब महिला और बच्चा उस सीट पर बैठे थे.. और मैं उनके सामने ही खड़ा था.. महिला के होठ हिले.. पर आवाज नहीं आ रही थी.. लेकिन उसकी आंखे शायद मुझे धन्यवाद कह रही थी.. माँ और बच्चा दोनों खुश थे आराम से थे.. और मैं खडे़ खडे़ "तीसरी खुशी" के बारे में सोचता हुआ सफर कर रहा था....
महंगी पड़ी काग्रेस..
दिल्ली चुनावों में भाजपा के चुनाव की पंच लाईन.. कहते है अरुण जेटली के दिमाग की उपज थी..."महंगी पड़ी काग्रेस.. ".. भाजपा को वोट दें...
शायद अरुणजी दिल्ली की जनता को नहीं जानते, वो मंहगी चीजें ही पंसद करेती है.... तभी तो शीला जी आन 45 का आंकडा के खुश हो रही है...और ये स्लोगन अब अरुण जी को मंहगा पड़ गया..
मत ध्यान बटाओं हमारा...
मुंबई में आतंकी हमले के बाद अंग्रेज दुम दबा कर भाग गये... ७-० से हारने से बेहतर था ५-० से हारना..
पूरा देश नेताओं से हिसाब माँग रहा है और आम आदमी इंसाफ कि उम्मीद में खडा़ है.. हम आक्रोशीत है.. और action चाहते है.. नेता अपना मानसिक संतुलन खो चुके और ’बक’ रहे है..
शायद जनता का ये आक्रोश वो झेल नहीं पा रहे और action लेने की हिम्मत है नहीं.. हमारा और मिडिया का ध्यान बांटने अब वो नई साजिश कर रहे है... भगौडे़ अंग्रेजो को फि़र से बुला रहे है.. सोचते है.. कि हम क्रिकेट देखेगें.. और थोडे दिनों में भूल जायेगें मुंबई को..
सावधान.. ये कोशिश कामयाम न होने देगें.. नहीं देखना हमें गिल्ली डण्डे का खेल..
मत कोशिश करों हमारा ध्यान बांटने की..
हमे हिसाब दो..
इंसाफ दो..
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कौन कह गया कि फलों से लदे पेड झुकते है.....?
बडी उम्मिद से २-३ महिने पहले टिकट बनवाई थी.. गर्मी कि छुट्टीयों मे नानी के घर जायेगे.. छुट्टी मे घुमने किसी हिल स्टेशन जायेगे.. गांव जायेगे.. शहर जायेगे.... पता नही.. क्या क्या.. लेकिन १५ दिन हो गये.. सब अपनी जगह खडे है.. या ये कहे कि अडे है.. और आप हम जैसे आम आदमी अटके है.. ..
अटकन के इस समय मे एक बात और अटक गई है.. और इस बार अटकन भी बडी अजीब है.. या कहे कि ये अटकन नहीं अकड है...महारानी साहिबा कि..महारानी इसलिये क्योंकि.. मुख्यमंत्री तो जनता का होता है...
अब मुद्दे पर.. महारानी ने बयाना जाने से मना कर दिया.. कहती है..कि.."बयाना मे एसी कोइ जगह नहीं है जहां बात हो सके.."
महारानी भुल गई कि वो १२ दिन पहने बात करने ही बयाना गई थी.. तब बैसला जी पीलुपुरा में अटके थे.....महारनी ने पीलुपुरा जाने से मना कर दिया... कहा.. बयाना आओ...अब बैसला जी..१२ दिन मे ३० किमी चल के बयाना आये है..तो महारानी जयपुर बुला रही है...पता नही बात करने मे जगह क्या भुमिका अदा करती है...और १२ दिनों मे उस जगह को क्या हो गया..
बैसला जी आप तो वहीं जमे रहो... क्योकीं इस स्पीड से आप जयपुर जाओगे... तब तक हो सकता है.. महारनी.. चली जाए... इलेक्शन आने को है.. आप तने रहो..
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कोइ मेरे सब्र का इंतिहान ना ले!!
राजस्थान के गृह मंत्री ओर मुख्यमंत्री को ये कहते हुये रोज सुना जा सकता है.. ये साहब और साहिबा ये नहीं बता रहे है कि इनके सब्र कि सीमा क्या है? ये कब कहेगे ...ओर नहीं..बस ओर नहीं
६-७ दिन हो गये.. रास्ते बन्द है.. ट्रेन जा नहीं रही.. जनजीवन अस्त व्यस्त है.. ओर कोइ कुछ नहीं कर रहा.. इन्तजार के सिवा... दोनो पक्ष अडे है... ओर संवादहिनता कि स्थति बनी हुई है..
लगने लगा है राजस्थान मे सरकार नाम कि कोई चिडिया नहीं है... ओर बैसला साहव अहिंसा ओर आन्दोलन के नाम पर लाखों लोगो का जीना हराम कर रखे है..
इन्होने पिछली बार भी इसी तरह से सरकार को बन्दी बनाया था.. सरकार अपने हाथ जला चुकि थी.. स्पष्ट है कि सरकार ने कोइ सिख नही ली.. ओर भविष्य के लिये कोई रणनिति नहीं बनाई.. चंद IAS ओर IPS के तबादले कर सोच लिया कि सब ठीक हो जायेगा..
आस्तिकता की हद है.. लेकिन ये भुल गये कि ईश्वर उनकी मदद करता है जो खुद अपनी मदद करते है.... या फिर ये सब इश्वर कि लिला समझ के मुक दर्शक बने है...
हे माता वसुन्धरा.. हे अन्न्पुर्णा देवी... हे महारानी... (आपके समर्थक आपको यही कहते है)... कृपा करें.. कुछ करें.. ओर मेरे मरुधर देश का अमन लौटा दिजीये..
शांतिपुर्ण आन्दोलन का आगाज - ५ मरे
कर्नल बैसला के अहिंसात्मक - शांति पुर्वक आन्दोलन का आगाज हो गया.. अब से लगभग ३ घण्टे पहले.. अब तक ५ लोग मारे जा चुके है.. जान, माल, सुख, चैन, शान्ति, हसी गिरवी रख के आरक्षण लोगे क्या ? राजनैतिक लडाई मे आम जनता क्यो पिसे..... शान्ति..शान्ति..शान्ति... इश्वर सद्बुधि दे....

