युगान्तर

वो सुबह कभी तो आयेगी..............

थाई मसाज (Thai Massage)

सफारी वर्ड में थाई मसाज का आनंद लिया... देखें ये वीडियो....



बाकी बातें आदि के ब्लॉग पर..... यहाँ, यहाँ और यहाँ  है...

(Safari world, Bangkok, Thailand)

बच्चों के लिए ५ खतरनाक चीजें - गेवर टुली

कैसे हम बच्चों को सीखने से रोक देते है.. और कैसे सिखा सकते है.. देखें इस वीडियो में..



आदि ये सब करने वाला है...



Gever Tulley on 5 dangerous things for kids

सफारी वर्ड टिप्स.. (Tips to visit safari world)

बैंकोक घूमने का प्लान है और सफारी वर्ल्ड जा रहे है तो ये टिप्स लेते जाइए... शायद काम आ जाए...

  1. सप्ताह के दिनों में ये सुबह १० बजे खुलता है और छुट्टियों और सप्ताहांत के दिन सुबह ९ बजे... ३६५ दिन खुलता है...जितना जल्द पहुँच जाए उतना बेहतर... 
  2. सफारी वर्ल्ड के दो भाग है... सफारी पार्क और मरीन पार्क.. दोनों के अलग अलग टिकट है..  बेहतर है आप दोनों टिकट लें... चेक करे शायद ट्रेवल एजेंट से टिकट सस्ता मिल जाए ....  हमें ट्रेवल एजेंट ने दोनों टिकट ७५० बाहत में दिए.. सफारी वर्ड में इनकी कीमत ८०० बाहत है.... और टिकट लेने पर गाड़ी भी सस्ती मिली...
  3. मरीन पार्क पहले देख ले.. लगभग सभी शो सुबह होते है.. 
  4. बहुत सारे शो है... (शो के लिए अलग से टिकट नहीं है) पहले से तय कर ले आपको कौनसा/से शो देखना है.... अगर आप सारे शो देखते है तो आप पक्षियों और जन्तुओ को करीब से देखने का मौक़ा खो देगें..
  5. डोल्फिन शो जरुर देखे.. बहुत खूबसूरत है..
  6. जिराफ टेरेस शानदार है.. आप जिराफ को छू सकते है.. खिला सकते है.... कोल्ड ड्रिंक पीकर थकान दूर करते हुए उन्हें निहार सकते है...
  7. Animal Feeding बहुत पोपुलर है.. काफी जगह है.. केवल ४० बाहत लगते है.... 
  8. मरीन पार्क करीब तीन -चार घंटे में घूम सकते है और सफारी पार्क देखने मे करीब एक घंटा लगता है...  सफारी पार्क में अपनी कार से जाए तो बेहतर..वरना २० बाहत में बस का टुअर कर सकते है.. अपनी कार हो तो आप अपनी इच्छा अनुसार कम या ज्यादा समय रुक सकते है.. 
  9. मरीन पार्क से बाहर जाते हुए री-एंट्री स्टाम्प लगवा सकते है... क्या पता फिर आने का मुड बन जाए..
  10. सफारी वर्ल्ड बहुत व्यवस्थित तरीके से बनाया हुआ है..  फोटोग्राफी की प्रचुर संभावनाए है... एक्स्ट्रा बेटरी रखें... 
  11. बाकी थाईलेंड की तरह यहाँ भी शाकाहारी खाने के बहुत कम विकल्प है.. अच्छा ब्रेकफास्ट लेकर आयें..

फोटो देखने के लिए तो आपको आदि के ब्लॉग पर जाना होगा... यहाँ और यहाँ..

(Tag: safari world, safari park marine park, bangkok, Thailand, amazing Thailand)

आल इज वेल...

सुबह से सब परफेक्ट था.. सब कुछ इतना सामान्य की ताज्जुब हो रहा था... एसा भी हो सकता है क्या.. तय वक्त पर तैयार होना.. आदि का अच्छे मुड में होना..बिना ट्रेफिक में फंसे एअरपोर्ट पहुँच जाना... बोर्डिंग कार्ड के लिए कोई कतार नहीं होना.. ६० किग्रा अतिरिक्त वजन होने पर भी एयरलाइन का केवल ३० किलो के लिए पैसे लेना :)... इमिग्रेशन एक मिनिट में हो जाना.. सुरक्षा जांच के लिए कोई लाइन न होना.. फलाईट के लिए २ घंटे का इंतज़ार आराम से बीत जाना.. आदि का प्ले एरिया में मस्ती करते हुए लंच कर लेना.. बोर्डिंग करके टेक आफ से पहले ही आदि का सो जाना.. और अगले तीन  घंटे तक सोते रहना...

खुशफेमिया.. यहीं ख़त्म नहीं हुई.. बैंकाक एअरपोर्ट पर कस्टम जांच बिना निकल जाना (सामान्यतः बैकाक में कस्टम जांच पर सारे सामान का एक्सरे होता है.. ). खैर... इन सभी को इंजॉय करते करते हम अपने नए अपार्टमेन्ट में पहुँच गए.. अपार्टमेंट हमारी अपेक्षाओं के हिसाब से तैयार था.. सब कुछ परफेक्ट..... शायद तूफान के पहले की खामोशी थी.. या कहें की किसी बड़ी विपदा के लिए ऊर्जा बचाने की जुगत थी.. और वो शुरू हुई जब मैंने रिशेप्सन पर पूछा की "मेरे दफ्तर से मेरे लिए एक लिफाफा रखा है, वो दे सकते है?".. पहले जबाब मिला नहीं रखा.. और फिर जबाब मिला की कुछ देर में ढूंढ़ कर देते है.. कुछ देर जब ज्यादा होने लगी तो फिर से पता किया.. और काफी मशक्कत के बाद पता चला की वो खो गया है.. गलती से किसी और को दे दिया.. और वो महाशय उसे पराई अमानत समझ अपार्टमेंट में ही छोड़ कर चले गए और सफाई करने वालो ने अपना फर्ज निभाते हुए उसे कचरे के हवाले कर दिया.. उस लिफाफे में कुछ ख़ास नहीं था.. बस एक वीजा फीस जमा कराने की रसीद थी.. और वीजा इंटरव्यू सुबह ८ बजे था.. और मुझे करीब ७.३० पर पहुँचना था.. बिना रसीद के इंटरव्यू में जा नहीं सकता.. और रविवार रात ९ बजे दूसरी फीस जमा नहीं हो सकती.. सुबह पोस्ट ऑफिस ८ बजे खुलती है.. और ८.३० से पहले दुबारा फीस जमा नहीं हो सकती... वीजा अपोइन्टमेंट विशेष अनुरोध पर मिला था.... और रात के ९ बजे बदल भी नहीं सकता था... समझ पर ताले लग गए.. और रास्ते सारे बंद नजर आने लगे.. स्थानीय साथियों से विकल्प का पता किया तो निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला.... आखिर गूगल बाबा की शरण में गया.. पता चला की एयरपोर्ट पर एक पोस्ट ऑफिस २४ घंटे खुलती है... कुछ उम्मीद नजर आइ और वंहा पर वीसा फीस भी जमा होती है, और शुकून मिला...पर ये पता नहीं चला ली वीजा फीस भी २४ घंटे जमा होती है..... रिशेप्शन पर बताया.. मेनेजर से बात की.. तो वो तुरंत  एयरपोर्ट जाने के लिए तैयार हो गए..(आखिर उन्हें पता था की उन्होंने कितनी भयंकर भूल की है)..तब तक पोस्ट ऑफिस का फोन नंबर भी मिल गया.. और ये भी पता चल गया की फीस भी २४ घंटे जमा होती है... अपार्टमेन्ट स्टाफ पर ज्यादा भरोसा नहीं था तो खुद भी एयरपोर्ट चल दिया.. ४५ मिनट में  एअरपोर्ट पहुंचे.. एअरपोर्ट में जाने के लिए आपको न आई डी प्रूफ चाहिए न ही टिकट... बस रेल्वे स्टेशन की तरह घूस जाओ... १० मिनिट में फीस जमा हो गई.. और करीब रात १२ बजे फिर से अपने ठीकाने पर थे.. समस्या सुलझ गई...

समाधान तो कुछ मिनिटों में हो गया पर तनाव से २-३ घंटो में.. "आल इज वेल..." और "हरी इच्छा प्रबल...." दोहराने से शान्ति जरुर मिली...

एअरपोर्ट से वापस आते हुए मैंने मेरे ब्रह्म ज्ञान  "हर समाधान एक नई समस्या की शुरुआत है..  का विस्तार किया... और उसमें एक और वाक्य जोड़ा ...."और हर समस्या का समाधान होता है"... और अभी तक का ज्ञान ये हुआ...

"हर समाधान एक नई समस्या की शुरुआत है, और हर समस्या का समाधान होता है"

"Every solution is the beginning of new problem and every problem has a solution"

शांति बनाये रखने के लिये नोबल


ओबामा महाशय को नोबल पुरस्कार क्या मिला सभी उनके पीछे लग गये.. सवाल उठने लगे... उनकि क्या उपलब्धि है, उन्होने आखिर क्या किया, अभी केवल बातें कि काम होना बाकि है.. वगैरह वगैरह..  अरे भाई ये पुरस्कार उन्हें शांति का संदेश देने या विश्व शांति की दिशा में पहल करने के लिये नहीं दिया जा रहा..  ये पुरस्कार तो उन्हे शांति बनाये रखने के लिये दिया जा रहा है... कैसे.. जरा सोचो अगर ओबामा चाहते तो अपने अग्रज बुश भाई साहब जैसे इराक पर बम डाल सकते थे...
ओसामा कि खोज तेज करने के लिये अफगानिस्तान पर बम बरसा सकते हैं... भारत में २६/११ के हमले में पाकिस्तान का हाथ होने पर पाकिस्तान में आंतकि खोजने जा सकते थे... , ड्रोन से हमले करवाने के बजाये परमाणु बम फोड़ सकते थे.. भाई एक ताकतवार आदमी क्या क्या नहीं कर सकता.. पर उन्होने नहीं किया.. दिया न शांति में योगदान.. बने न वो नोबल के हकदार.. तो बजाओ ताली....

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आदि साहेब जोधपुर पहुँच गये है.. दिपावली मनाने आदि के बारे में जल्द ही यहां पर..

ये कैसी पत्रकारिता..



"टाइम्स ऑफ इंडिया" के दिल्ली टाइम्स में मुख्य पृष्ठ पर बलात्कार के आरोपी अभिनेता "शाइनी आहुजा" कि तस्वीरों के साथ उनकी पत्नी का इंटरव्यु छपा है.. शाइनी तीन महिने हवालात में रह कर अब जमानत पर बाहर आयेगा.. बहुत महान काम के लिये वो जेल में गये थे.. एक आरोपी को महिमा मंडित कर समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं.. गलत कारणों से सुर्खिया बटोरने वाले इन तथाकथित पेज तीन के लोगों के अपराध को इस तरह से पेश करना जैसे कुछ नहीं हुआ हो? क्या ये पीडितों के घाव पर नमक छिड़कने जैसा नहीं है...

जो सवाल "ToI" ने शाइनी कि पत्नी से पुछे अगर वो ही सवाल उस पीडिता से पुछे जाते तो क्या जबाब मिलता? पढिये पीडि़ता का काल्पनिक इंटरव्यु-

दो जुते लगाऊगीं...


सवाल - क्या आपको अनुमान था कि "शाइनी" को जमानत मिल जायेगी?
जबाब - हमको तो कानून पर भरोसा था, लग रहा था कि अब वो जेल में सारी उम्र चक्की पिसेगा, पर अब क्या बताऐं.. बडे़ लोग है.. तिक्कडम लगा कर बाहर आ ही गया...


सवाल - गुरुवार को क्या खास था, जिससे उसे जमानत मिल गई?
जबाब -  हम क्या बताऐं, लगता है हमारा केस लड़ने वाले थक गये और उसे बाहर निकाल दिया...


सवाल - आपने कैसी प्रतिक्रिया दी जब आपने सुना कि "शाइनी" को जमानत मिल गई?
जबाब -  मैं तो चक्कर खाकर गिर गई.. हमने सोचा था कि सारी उम्र जेल में रहेगा, पर बड़े लोग बड़ी बातें..


सवाल - आप "शाईनी" से मिलने कि क्या योजना बना रहे हैं... - चूम कर या गले लगा कर..
जबाब - (रोते हुऐ) दो जुते लगाउंगी... पूरे परिवार को लेकर पहूचुगी.. मौका मिला तो खुब धुनाई करुंगी..


सवाल - क्या इससे आप "शाइनी" के और करीब आई..
जबाब -  करीब? अरे वो तो हमारी नजरों से गिर गया... 


सवाल - क्या आप वापस गाँव जाने कि योजना बना रहे हैं?
जबाब -  ना जी, जब तक इस केस का फैसला नहीं जाता और दोषियों को सजा नहीं मिलती हम कहीं नहीं जायेगें..


सवाल - क्या आपके उसकी आजादी की दुआ कि थी?
जबाब -  आजादी की दुआ? हम तो हर मंगल सिद्धीविनायक मंदिर में उसे सजा दिलाने की कामना करती थी.. पर भगवान भी हम गरीबों कि कहां सुनता है.. 


सवाल - "शाइनी’ कि तबियत अब कैसी है?
जबाब -  अरे जब ईमान (moral)  ही गिर गया उसकी तबियत का क्या.. 


सवाल - क्या आपको बुरा लगा कि "शाइनी" को मुंबई में रहने से मना कर दिया..
जबाब -  अरे वो तो धरती पर हि रहने लायक नहीं है.. उसे मुंबई तो क्या कहीं नहीं रहने देना चाहिये.. पर जब वो बाहर आ ही गया तो क्या फर्क पड़ता है कि वो कहां रहे.. बडे़ लोग है..


सवाल - क्या "शाइनी" फिल्मोम में आयेगा?
जबाब -  पब्लिक जुते मारेगी आयेगा तो... कौन अपने पैसे बर्बाद करेगा एसे लोगों कि फिल्म देख कर..




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आदि कि खबर यहां पर

हमारी तो शक्ल पर लिखा है कि हम शरिफ़ है..

त्रिवेंद्रम एयरपोर्ट से -

कन्याकुमारी जिले से वापसी (दिल्ली) की यात्रा थकाने वाली होती है.. कन्याकुमारी के जिला मुख्यालय नागरकोविल से त्रिवेंद्रम और त्रिवेंद्रम से दिल्ली..

प्राथमिकता रहती है कि त्रिवेंद्रम से सुबह कि फ्लाईट से दिल्ली आ जाये.. त्रिवेंद्रम से IC कि फ्लाइट ’नल आर आर’ मतलब IC 466.. (इतनी मलयाली तो समझ आ गई) सुबह ६.१५ पर चलती है.. तो सुबह ५.१५ पर एयपोर्ट के दरवाजे पर दस्तक दे दाली.. और कुछ ही सेकण्डस में हमारी सारी थकान दूर हो गई..

मुख्य दरवाजे पर सुरक्षा कर्मी को टिकट थमाया.. उसने देखा (टिकट का जो हिस्सा उसके सामने था उसमें ज्यादा से ज्यादा ये ही पढ़ सकता था).. कि किस तारिख और समय कि फ्लाईट है.. किसका टिकट है.. शायद उसे मतलब नहीं... और मैं इंतजार कर रहा था कि अब वो मुझसे परिचय पत्र मागेंगा, एक हाथ जेब की और जाने वाला था कि मेरी खुशी का ठिकाना न रहा.. उसने इशारा किया "रहने दो"... मजा आ गया सुबह सुबह प्रमाण पत्र मिल गया कि मै शरिफ़ हूँ.. और ये मेरी शक्ल पर लिखा है..और क्या चाहिये..

मजे कि बात ये कि बोर्डिंग कार्ड जारी करने वाले महाशय ने भी मेरा परिचय पत्र नहीं मांगा... तो आप निश्चिंत रहिये.. हमारी सुरक्षा कुशल हाथों में है.. या कम से कम मैं तो शरिफ़ हूँ..:)

सकुशल पहुचे तो दिल्ली जाकर आपकी प्रतिक्रिया देखेगें..

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यहां देखे आदि आज क्या नई शरारत कर रहा है...

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www.blogvani.com चिट्ठाजगत